शुक्रवार, 12 नवंबर 2021

आशुतोष जी से शब्दों का आलोक मिलता रहे

 


ईश्वर से कामना है हमें शब्दों का आलोक चाहिए लेकिन आशुतोष जी का...। उनके शब्दों का, उनके चिंतन का...। आशुतोष हो जाना आसान नहीं है लेकिन उनके आलोक को हासिल करना और उसके तेज को आत्मसात करना भी ईश्वर का ही आशीष है..। मैं हमेशा से कहता हूँ कि आशुतोष को समझने के लिए मन का आशुतोष होना अनिवार्य है लेकिन ये भी महसूस करता हूँ कि उनके चिंतन के शाब्दिक चेहरे का आभा मंडल भी परम सत्ता की भांति ही दमकता है...। हम उनका अभिनय देखें लेकिन हमें यदि चरित्र निर्माण पर गहन होना है तो उन्हें पढ़ना होगा....। आपका लेखन आपकी पहचान है, उसके भाव और गहन चिंतन जीवन के दर्शन से रूबरू कराते हैं। हम कहीं ठहर जाना पसंद करते हैं जब भी कोई लेखन हमें अपनी सी अनुभूति करवाता है। हम शब्दों में जीने वालों को एक मौन हमेशा से अपनी ओर खींचता रहा है, लेखन की प्रेरणा बनता रहा है...। आपका लेखन मौन की भावाव्यक्ति है...। आशुतोष होकर लिखना और गहन हो जाना आसान नहीं है, लेकिन हमें आपके माध्यम से आशुतोष सा शाब्दिक मौन हमेशा मिलता रहा है, हमें ये आलोक सतत चाहिए और हम अपने भीतर आशुतोष को गहरे तक जगह दे चुके हैं। हम खुशनसीब हैं जो हमारी पीढ़ी को आशुतोष राणा मिले हैं...और यह सदी भी धन्य है जो रामराज्य की गवाह बनी है...।
खूब शुभकामनाएं आदरणीय #AshutoshRana भाईसाहब....। ईश्वर आपसे गहन लेखन करवाता रहे....।


गुरुवार, 11 नवंबर 2021

मन में बस जाती हैं कुछ यात्राएं ...अगला अंक- यात्रा वृतांत (प्रकृति के बीच)

जीवन में यात्राएं हमें बहुत सिखाती हैं, यदि यात्राएं प्रकृति के बीच हों या प्राकृतिक स्थलों की हों तो हमारे मन में कहीं याद बनकर रह जाती है, लिखियेगा ऐसा ही कोई वृतांत जो आप हमेशा अपने में संजोय रहते हैं, प्रकृति दर्शन, राष्ट्रीय मासिक पत्रिका का दिसंबर का अंक यात्रा वृतांत (प्रकृति के बीच) पर केंद्रित रहेगा, इसके लिए यात्रा वृतांत आमंत्रित हैं जो हमें 22 नवंबर तक ईमेल के माध्यम से हमें भेजे जा सकते हैं। 

अपने यात्रा वृतांत के साथ फोटोग्राफ और उनका विवरण अवश्य भेजिएगा...। अपने यात्रा वृतांत की सूचना हमें व्हाटसऐप पर भी दी जा सकती है। 


- प्रकृति दर्शन पत्रिका, ऐप पर भी उपलब्ध है, आप गूगल प्ले स्टोर से ऐप डाउनलोड कर सकते हैं...।


संदीप कुमार शर्मा

प्रधान संपादक, प्रकृति दर्शन

ईमेल- editorpd17@gmail.com

मोबाइल/व्हाटसऐप- 8191903651

वेबसाइट- www.prakritidarshan.com

प्रकृति दर्शन का नवंबर अंक ‘प्रकृति और संस्कृति’ पर


आपकी अपनी पत्रिका प्रकृति दर्शन का नवंबर माह का अंक ‘प्रकृति और संस्कृति’ पर केंद्रित है, प्रकृति और संस्कृति का कितना गहन जुड़ाव है इसी को इस अंक में हमारे लेखक साथियों ने रेखांकित करने का प्रयास किया है। खुशी की बात यह है कि इस अंक में हमारे तीन ब्लॉगर साथियों की भी सहभागिता है। जिज्ञासा सिंह जी की कविता, श्वेता सिन्हा जी की कविता और उनके फोटोग्राफ तथा मीना शर्मा जी के फोटोग्राफ। आप सभी का आभार। 
 यह अंक तकनीकी कारणों से लेट है इसके लिए क्षमाप्रार्थी हैं। इस अंक के कवर पेज पर फोटोग्राफ नवदुनिया के फोटोजर्नलिस्ट अबरार खान का है, कवर पेज आपके अवलोकनार्थ प्रस्तुत है, पत्रिका मोबाइल ऐप पर उपलब्ध है, पत्रिका को पढ़ने के  लिए गूगल प्ले स्टोर से ऐप डाउनलोड कर सकते हैं।
आप पत्रिका को गूगल प्ले बुक पर भी पढ़ सकते हैं इसके लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कीजिएगा।


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शुक्रवार, 8 अक्तूबर 2021

नवंबर का अंक- ‘प्रकृति और संस्कृति’ विषय पर...आलेख आमंत्रित


राष्ट्रीय मासिक पत्रिका ‘प्रकृति दर्शन’ नवंबर का अंक- प्रकृति और संस्कृति विषय पर केंद्रित है, इसके लिए आप सभी सुधी लेखक साथियों से आलेख और रचनाएं आमंत्रित हैं। रचनाएं आप हमें 16 अक्टूबर तक ईमेल के माध्यम से प्रेषित कर सकते हैं। दोस्तों महापर्व आने को है ऐसे में उल्लास, उत्साह के बीच कुछ गहन और बेहद जरुरी मंथन हो जाए ताकि सदियों तक उत्सव का उल्लास भी कायम रहे और प्रकृति भी बेहतर रह सके...क्योंकि यदि हम नहीं चेते तो यकीन मानियेगा कि संकट भविष्य पर है। 
विषय विस्तार- प्रकृति, प्रवृत्ति और संस्कृति तीनों बेहद समग्र हैं और प्रकृति और प्रवृत्ति से ही संस्कृति का निर्माण होता है। हमें आकलन करना चाहिए कि संस्कृति ने प्रकृति को बेहतर बनाने के लिए क्या किया है और प्रकृति हमारी संस्कृति में किस तरह समाहित है, हमारी संस्कृति के रंग कितने गहरे हैं जो प्रकृति से हासिल हुए हैं, क्या संरक्षण के बीच प्रकृति बाधित भी हो रही है ? उत्सव, उल्लास के बीच क्या प्रकृति पर भी सोचने का समय हमें निकालना चाहिए...? मौजूदा हालात में जब प्राकृतिक आपदाएं हमारे लिए चुनौती बन रही हैं तब इस विषय पर मंथन बेहद आवश्यक हो जाता है। दीपावली महापर्व पर यह विशेष अंक रहेगा...आलेख में ध्यान रखियेगा कि कम शब्दों में अधिक बात समाहित हो सके। आलेख के आखिर में संक्षिप्त परिचय और आलेख या रचना मौलिक और अप्रकाशित होने की सूचना भी अवश्य लिखियेगा। 
आलेख 16 अक्टूबर शाम पांच बजे तक मेल कर सकते हैं। आलेख प्रकाशन के लिए स्वीकृत होने की ही सूचना दी जाएगी। 

संदीप कुमार शर्मा
प्रधान संपादक, प्रकृति दर्शन, मासिक पत्रिका
ईमेल- editorpd17@gmail.com
वेबसाइट- www.prakritidarshan.com
मोबाइल/व्हाटसऐप- 8191903651




 

मंगलवार, 28 सितंबर 2021

प्रकृति को बदलना है, सोच बदलिये


हम ठान लें कि सोशल मीडिया पर महीने में दो पोस्ट प्रकृति संरक्षण या जागरुकता की अवश्य लिखेंगे और महीने में एक बार कुछ दिनों के लिए डीपी पर भी प्रकृति को ही जगह देंगे, क्यों न हम अपनी डीपी पर पीपल, आम, नीम, आंवला या कोई और वृक्ष लगाएं...एक अभियान तो चलेगा सुधार का, आप चाहें तो पोस्ट को इसे शेयर कीजिएगा...पत्रिका बहुत कुछ नया लेकर लक्ष्य की ओर अग्रसर है... आप सभी का सहयोग हमारी ताकत बनेगा...। मैंने तो शुरुआत कर दी है...आप भी कीजिएगा...क्योंकि प्रकृति सभी की है। 


 

गुरुवार, 9 सितंबर 2021

अक्टूबर अंक का विषय- हैप्पीनेस इंडेक्स...खुशी की प्रकृति

 













प्रकृति दर्शन, पत्रिका में आलेख आमंत्रित हैं

दोस्तों त्योहारों के कारण अक्टूबर और नवंबर के माह हम भारतीयों की खुशियों के माह होते हैं, बेशक हम कितने भी थक जाएं, लेकिन इन महीनों में हम अपनों के बीच होते हैं, मुस्कुराते हैं और उम्मीद से लबरेज हो जाते हैं...लेकिन केवल एक या दो ही माह की खुशी क्यों ? केवल कुछ चुनिंदा अवसरों पर ही खुशी क्यों और क्यों हमेशा हम खुशी से नहीं जी सकते...? क्यों हम अपने यहां कोई हैप्पीनेस इंडेक्स नहीं बना पाए ? क्यों हमने यह नहीं सोचा कि प्रकृति और खुशी के बीच एक रिश्ता है या यूं कहा जाए कि खुशी का प्रकृति से गहरा नाता है। ऐसा माना जाता है कि आपके खुश रहने में प्रकृति की बहुत अहम भूमिका है। जानते हैं कि दुनिया के लगभग अधिकांश देश हैप्पीनेस इंडेक्स पर प्रमुखता से कार्य कर रहे हैं, प्लानिंग भी उसी तरह बनाई जा रही हैं। प्रकृति केंद्रित योजनाओं पर कार्य आरंभ हो गया है...हम कहां हैं और हमें क्या करना चाहिए...लिखिएगा...बहुत महत्वपूर्ण विषय है- अगला अंक इसी महत्वपूर्ण विषय पर...। आलेख आमंत्रित हैं...दोस्तों 20 सितंबर तक आलेख ईमेल पर अवश्य मिल जाएं...। 


संदीप कुमार शर्मा

प्रधान संपादक, प्रकृति दर्शन, राष्ट्रीय मासिक पत्रिका

वेबसाइट- www.prakritidarshan.com

ईमेल- editorpd17@gmail.com

मोबाइल/व्हाटसऐप- 8191903651

बुधवार, 8 सितंबर 2021

जलपुरुष डाँ. राजेंद्र सिंह जी ने किया प्रकृति दर्शन, पत्रिका का ऐप लाँच...

आज बड़े उत्साह का दिन है कि जलपुरुष और मैग्सेसे अवार्ड से सम्मानित आदरणीय राजेंद्रसिंह जी द्वारा राष्ट्रीय मासिक पत्रिका ’प्रकृति दर्शन’ के मोबाइल एप्लीकेशन को लॉच किया गया है। इस अवसर पर राजेंद्रसिंह जी ने कहा कि आज जब पर्यावरण को लेकर चारों ओर चिंता गहरा रही है, आपदाएं जीवन की मुश्किल बढ़ा रही हैं, हमें कल बेहतर बनाना होगा, यहां राहत की बात यह है कि हमारे ही बीच राष्ट्रीय मासिक पत्रिका, ‘प्रकृति दर्शन’ सतत पर्यावरण जागरुकता के विषयों पर कार्य कर रही है। आज मुझे पत्रिका का मोबाइल ऐप लॉच करते हुए खुशी हो रही है कि पत्रिका ने डिजिटल की दिशा में अपने कदम अग्रसर किए हैं। मैं ‘प्रकृति दर्शन’ पत्रिका की समस्त टीम को बधाई देते हुए बेहतर भविष्य की कामना करता हूं...। प्रकृति दर्शन परिवार जलपुरुष राजेंद्रसिंह जी का आभारी है जो आपका आशीष हम पर सतत बना हुआ है...। 
वर्तमान अंक जलवायु परिवर्तन पर केंद्रित है... इस बार के अंक में कवर पेज पर महेश मुदग्ल जी, भोपाल, मप्र का फोटोग्राफ है...।  खुशी होगी यदि आप इस अंक को ऐप पर ही पढ़ेंगे...। एक और निवेदन है कि ऐप डाउनलोड करते हुए आप अपने फोटोग्राफ हमें भेजिएगा... हम चयनित फोटोग्राफ अगले अंक में ससम्मान प्रकाशित करेंगे।    

एप्लीकेशन डाउनलोड करने के लिए क्लिक करे,  बेहतर समझें तो पोस्ट को शेयर भी कीजिएगा...


प्रकृति दर्शन की टीम के समस्त साथियों को भी खूब बधाईयां...जो हम सभी के प्रयास से यह संभव हो पाया....प्लानिंग, तकनीकी और मार्केटिंग टीम सदस्यों को विशेष आभार। बालादत्त सर, नेगी सर, मनीष जी, अवधेश जी...। खूब भालो...। 

संदीप कुमार शर्मा,
प्रधान संपादक, प्रकृति दर्शन, राष्ट्रीय मासिक पत्रिका   
ईमेल- editorpd17@gmail.com
मोबाइल/व्हाटसऐप-8191903651

आशुतोष जी से शब्दों का आलोक मिलता रहे

  ईश्वर से कामना है हमें शब्दों का आलोक चाहिए लेकिन आशुतोष जी का...। उनके शब्दों का, उनके चिंतन का...। आशुतोष हो जाना आसान नहीं है लेकिन उनक...