मंगलवार, 7 दिसंबर 2021

2022 का अंक- ‘नववर्ष और नवसृजन’, आलेख आमंत्रित


प्रकृति दर्शन, पत्रिका में जनवरी 2022 का अंक ‘नववर्ष और नवसृजन’ पर केंद्रित रहेगा। हमारे लिए नववर्ष साल में एक बार आता है लेकिन प्रकृति रोज और हर पल नवसृजन करती है। आईये बात करें कि हम नववर्ष में क्या नवसृजन करना चाहते हैं, प्रकृति को लेकर हमारे मन में सृजन का अंकुरण कैसा है और हम क्या उस अंकुरण को अपनी भावी पीढ़ी को दे रहे हैं, आईये संक्षिप्त में लिखिए और बताईये क्योंकि यह हमारा वार्तालाप, आपके अहसास भविष्य की एक नज़ीर लिख जाएंगे...। आप लिख सकते हैं कि प्रकृति के सृजन को आप कैसे देखते हैं, क्या आपने ऐसा कुछ महसूस किया है या कोई तस्वीर आपने क्लिक की है...या किसी ऐसे अनुभव को आपने कैनवास पर उकेरा है, चिटठी में लिखा है, अपनों को बताया है। पत्तों का रंग, फूलों का आकार, वृक्षों की शाखाएं, कद...बहुत है...। लिखिए दोस्तां...नववर्ष में हम नवसृजन लिखें, करें और तैयार हो जाएं कि हम अपनी प्रकृति के लिए दिन में एक घंटा अवश्य निकालेंगे...।


आप अपने आलेख हमें 18 दिसंबर तक ईमेल के माध्यम से प्रेषित कर सकते हैं। 


संदीप कुमार शर्मा, 

प्रधान संपादक, प्रकृति दर्शन, राष्ट्रीय मासिक पत्रिका 

ईमेल-           editorpd17@gmail.com

मोबाइल/व्हाटसऐप- 8191903651

प्रेम प्रतिबिंब होता है

  यकीन कीजिए प्रेम प्रतिबिंब होता है और मैं ऐसा क्यों कह रहा हूँ क्योंकि आप देखिएगा किसी सुर्ख गुलाब को देखने पर ही हमारे अंदर भाव अनुभूति ब...