शुक्रवार, 20 मई 2022

यह जिंदगी का तिलिस्म है

 

जब कुछ टूट रहा होता है, बिखर रहा होता है, निस्तेज हो रहा होता है तब यकीन मानिए कि कहीं कुछ नया रचा जा रहा होता है। कुछ कोपलें रंग पाती हैं, निखार पाती हैं, इसी दौर में कुछ पत्ते पीले होकर गिर जाते हैं। यह समय है दोस्तों और इसमें शीर्ष भी है और उससे वापसी भी है। हमें धैर्य रखना चाहिए क्योंकि आज हम शीर्ष पर हैं तो कल हमें नीचे की ओर आना है और यदि हम नीचे की ओर है तो हमें शीर्ष की ओर अग्रसर होना है, यह एक प्रक्रिया है और इस प्रक्रिया का अनुसरण करते हुए दोनों ही स्थितियों में मुस्कुराना यही जीवन की जीत है और उसका दर्शन है। हमें समझना है कि यदि हम शीर्ष पर ठहरने की जिद करते हैं तो यह संभव नहीं है क्योंकि विकास एक प्रक्रिया है और वह एक दिन आपको मिटाता भी है और दोबारा आपमें से ही किसी को नये तरीके से बनाता भी है। यह मानव स्वभाव है कि सफलता के दिन सभी को अच्छे लगते हैं लेकिन जब आप अवसान की दिशा में होते हैं तब बैचेन हो उठते हैं। खैर, समझिए कि हमें केवल अपना कर्म करना है और अपनी दिशा में अग्रसर होना है। यह जिंदगी का तिलिस्म है, टूटता है और बिखरता भी है, फिर शीर्ष हो जाता है। 


बुधवार, 11 मई 2022

हम आग से खेल रहे हैं

 


सोचिएगा कि सुबह उठे और दरवाजा खोलते ही तेज आग की लपटें आपको छू जाएं...आप क्या करेंगे... दरवाजा बंद कर देंगे। सोचिये कि ऐसी आग में जब जंगल कई दिनों तक झुलसते हैं तब वन्य जीव कैसे रहते होंगे...। दरअसल हम नादान नहीं हैं लेकिन आग से खेल रहे हैं। तापमान चढ़ रहा है। उस जंगल में वन्य जीवों के मन की बात लिखूं तो आपस में बतियाते अवश्य होंगे कि अब कितना जंगल बचा है और कितना जीवन...पता नहीं। जंगल है तो अंदर से वीरान, सूखा, जला हुआ, बिना फल वाला, बिना छांव वाला, बिना सुरक्षा वाला, हर वक्त भय देता हुआ, आदमी की लालची नज़रों में चढ़ा...आखिर जंगल कब तक है। हर आदमी अंदर जंगल हो गया है, जंगल ओढ़कर फिर रहा है, आदमी जंगल मिटाकर शहर बनाना चाहता है लेकिन असंख्य जीव जंगल खोकर, जान खोकर हमारी क्रूरता का इतिहास लिख रहे हैं। सूखे और तपे भविष्य में इतिहास होगा वह बेशक पढ़ा न जा सके लेकिन हमें हर वक्त वन्य जीवों और जंगल की चीखें सुनाई अवश्य देंगी। आग में जंगल नहीं हम दहक रहे हैं..। दहकते रहिए और अंजान रहिए क्योंकि आज बेशक कोई सवाल नहीं हैं लेकिन कल हम चीख रहे होंगे...। आधे जले और आधे सूखे ...।

प्रेम प्रतिबिंब होता है

  यकीन कीजिए प्रेम प्रतिबिंब होता है और मैं ऐसा क्यों कह रहा हूँ क्योंकि आप देखिएगा किसी सुर्ख गुलाब को देखने पर ही हमारे अंदर भाव अनुभूति ब...